इन महिलाओं से सावधान कर गए आचार्य चाणक्य, इनका साथ ले सकता है जान

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धर्मनीति, कूटनीति और राजनीति में पारंगत कौटिल्य ने अपने ज्ञान के दम पर चंद्रगुप्त मौर्य को राजा तक बना दिया, दुनिया उन्हें आचार्य चाणक्य के नाम से जानती है। आचार्य ने दुनिया भर को अपने ज्ञान से फायदा पहुंचाने की कोशिश की है। उन्हेंने कई सारी ऐसी बाते बताए हैं जिसके अनुसरण मात्र ले मनुष्य अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।

आचार्य ने कहा है कि, नौकरों को बाहर भेजने पर, भाई-बंधुओं को संकट के समय तथा दोस्त को विपत्ति में और अपनी स्त्री को धन के नष्ट हो जाने पर परखना चाहिए, अर्थात उनकी परीक्षा ऐसी विकट परिस्थितियों में करनी चाहिए।

बीमारी में, विपत्तिकाल में,अकाल के समय, दुश्मनो से दुःख पाने या आक्रमण होने पर, राजदरबार में और श्मशान-भूमि में जो साथ रहता है, वही सच्चा भाई या बंधु है, अन्य सब मोह माया है।

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जो अपने निश्चित कर्मों अथवा वास्तु का त्याग करके, अनिश्चित की चिंता करता है, उसका अनिश्चित लक्ष्य तो नष्ट होता ही है, निश्चित भी नष्ट हो जाता है।

बुद्धिहीन व्यक्ति को अच्छे कुल में जन्म लेने वाली कुरूप कन्या से भी विवाह कर लेना चाहिए, परन्तु अच्छे रूप वाली नीच कुल की कन्या से विवाह नहीं करना चाहिए क्योंकि विवाह संबंध समान कुल में ही श्रेष्ठ यानी बेहतर होता है।

लम्बे नाख़ून वाले हिंसक पशुओं, नदियों, बड़े-बड़े सींग वाले पशुओं, शस्त्रधारियों, स्त्रियों और राज परिवारो का कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों कभी भी आपके साथ कुछ भी कर सकते हैं। अगर किसी दुष्ट स्त्री के साथ आपना नाता है तो ऐसा भी हो सकता है कि वह बिस्तर पर ही आपकों मौत की निंद सुला दे।

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