Mahashivratri 2021 Puja Vidhi : महाशिवरात्रि पर मनोकामना पूर्ति के लिए ऐसे करें भगवान शिव का पूजन

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हिंदु का पवित्र त्यौहार महाशिवरात्रि अब ज्यादा दूर नहीं है. ये दिन भगवान शंकर का माना जाता है. कहा जाता है इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता गौरी का विवाह संपन्‍न हुआ था. सनातन धर्म में सभी व्रत त्‍योहार प्रमुख तौर पर किसी न किसी भगवान को समर्पित होते हैं और उन्‍हीं की इस दिन पूजा की जाती है. इस तरह महाशिवरात्रि का व्रत भी शिवजी और माता पार्वती को समर्पित होता है और इस दिन उन्‍हीं की पूजा भी की जाती है.

मान्‍यता है कि इस दिन जो भी सच्चे दिल से पूजा करता है भोलेनाथ उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. ये त्‍योहार उनकी वैवाहिक वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है. देवी पार्वती और शिवजी के मिलन के इस उत्‍सव को पूरे भारत में विशेष धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस दिन सभी लोग व्रत करके शिवजी की आराधना करते हैं और मनचाहा वरदान भी हासिल करते है. भगवान भोलेनाथ को भोला ही इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो बहुत जल्दी अपने भक्तों से भक्ति से खुश होकर उन्हें मनचाहा वरदान दे देते है. तो आज हम आपको बताने जा रहे है आप किस तरह महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा करके शिवजी को खुश कर सकते है.

बता दें कि महाशिवरात्रि के व्रत की शुरुआत त्रयोदशी से ही हो जाती है और इसी दिन से लोगों को शुद्ध सात्विक आहार लेना शुरू कर देना चाहिए. कुछ लोग तो इसी दिन से व्रत का आरंभ कर देते हैं. इसके बाद चतुर्दशी तिथि को पूजा करके व्रत करने का संकल्‍प लेते हैं. इस दिन शिवजी को भांग, धतूरा, गन्‍ना, बेर और चंदन अर्पित किया जाता है. वहीं माता पार्वती को सुहागिन महिलाएं सुहाग की प्रतीक चूड़ियां, बिंदी और सिंदूर अर्पित किया जाता है. अगर आप भी उपवास करते हैं तो पूरे दिन फलाहार ग्रहण करें और नमक का सेवन बिल्कुल भी न करें. अगर किसी वजह से नमक का सेवन करना पड़े तो सेंधा नमक का सेवन करें.

महाशिवरात्रि व्रतविधि

इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है. प्रत्येक पहर की पूजा में ऊं नम: शिवाय का जप करते रहना चाहिए. अगर शिव मंदिर में यह जप करना संभव न हो, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जप किया जा सकता है. चारों पहर में किए जाने वाले इन मंत्रों के जप से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. इसके अतिरिक्त उपवास की अवधि में रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते हैं.

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व्रत के नियम

महाशिवरात्रि के व्रत में नमक का सेवन नहीं किया जाता है. अगर फिर भी कोई बीमार है या फिर गर्भवती महिला हैं या बुजुर्ग हैं तो वह व्रत में फलाहारी नमक का प्रयोग कर सकते हैं. व्रत करने वाले व्‍यक्ति को दिन में निद्रा नहीं लेनी चाहिए और रात्रि में भी शिवजी का भजन करके जागरण करना चाहिए. इस दिन पति और पत्‍नी को साथ मिलकर शिवजी के भजन करने चाहिए. ऐसा करने से उनके संबंधों में मधुरता बनी रहती है. माना जाता है कि शिवजी को खट्टे फलों का भोग नहीं लगाना चाहिए और सफेद मिष्‍ठान का प्रयोग करना चाहिए.

व्रत के लाभ

महाशिवरात्रि का व्रत बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है. खासकर कि उन महिलाओं के लिए जो अविवाहित हैं. माना जाता है कि जो कन्‍याएं शिवरात्रि का व्रत करती हैं उन्‍हें जल्‍द ही व्रत का फल मिलता है और उनके विवाह के शीघ्र ही संयोग बन जाते हैं. वहीं विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत करती हैं तो उन्‍हें चिर सौभाग्‍य की प्राप्ति होती हैं और उनके परिवार में खुशहाली रहती है.

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